Friday, May 12, 2017

वो कहती थी

वो कहती थी , "तस्वीर में क्या रखा है" ,
हर वक़्त तस्वीर की खोज में रहते हो,
शायद उन्हें अब इल्म है कि ,
मुलाक़ात जब मुक़म्मल न हो ,
तो आशिक़ तस्वीरों से ही बातें किया करते हैं | 

 वो कहती थी , "आज भी आस है तुम्हें" ,
कोई उन्हें बता दे ग़ालिब ,
आस होती तो षड़यंत्र होता,
बेवजह है तभी तोह इबादत-इ-मोहब्बत है | 

वो कहती थी , "मुमकिन होता तो साथ होती मेरे" ,
मैंने हसकर कहा , बस इतना ही काफी है ,
संसार के बंधनो के पार , इक दुनिया है , 
वहां तू ही तो है साथ मेरे | 

वो कहती थी , "हम अलग हैं" , 
जानता था काफी जुदा हैं,
पर इंद्रधनुष की खूबसूरती की वजह , 
भी तो सात रंग हैं , 
काफी अलग अलग हैं जो, 
युहीं सोचा मैंने | 

वो कहती थी , "उसके मन में है कोई और"  , 
आशिकी में मेरी निखार आ गया था और ,
उसके मन में था कोई और  ,
हरचंद मेरे क़ल्ब में सिर्फ वो थी ,है, और | 

वो कहती थी , "इतना जूनून क्यों है" ,
मैं कहता था , तेरी कशिश का इल्म तुझे कहाँ है ,
तेरे नैनो का जज़्बा तुझे मालूम कहाँ है ,
इस फ़कीर की पूरी हुई मुराद है तू | 

वो कहती थी, "भूल जाओ मुझे",
मैं कहता था , 
"इश्क़ है मुझे तुमसे, 
इसमें तुम्हारा कारोबार क्या " | 

मोहब्बत एक तोहफा है ,
किसी की सोच ही तोहफा है ,
तेरे दिल में नाम है किसी का ,
खुदा से करीबी की पहली सीढ़ी यही है -  मोहब्बत | 


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